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Showing posts from June 29, 2014

Tanha, kaata jaata hai,

Tanha, kaata jaata hai, Dard, na baNta jaata hai,
Ghalti, hum se hoti hai, Bachcha daaNta jaata hai,
Raaj.neeti me ab, ... Aksar, Thook ke Chaata jaata hai,
Ek Suee Gum jaaye ager,  Kul Ghar, chaaNta jaata hai,
GAANTH MIYAAn, JEEWAN JOOTA, JAB TAK GAANTHA .. JAATA HAI. !!!.

बता ग़म-ए-फ़िराक़ पेहले खूं से किस को तर करूं

तुम्हारे लिये Jaana

बता ग़म-ए-फ़िराक़ पेहले खूं से किस को तर करूं
फ़िगार अपना दिल करूं के चाक मैं जिगर करूं


तुम्हारी कम तवज्जो मुझ से केह रही हैं बारहा तवील दास्तान को मैं अपनी मुख्तसर करूं


अजब नहीं है कुछ मियां गुमान के ये दौर में ज़मीं की खाक गर कहे के आसमाँ को सर करूं
सबा, दर-ए-हबीब को मेरा पयाम दे ज़रा के और कब तलक यहाँ मैं खुद को दरबदर करूं
निहाँ निहाँ से नक़्श-ए-यार इंतिहा-ए-शौक़ में अयाँ अयाँ से लग रहे हैं जिस तरफ नज़र करूं
इसी अमल और उलझनों में रेहता हूँ रवां दवां मैं उस नज़र के आगे कैसे खुद को मोतबर करूं

जो ठहर जाये तो आँखों में शरर जैसा है

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जो ठहर जाये तो आँखों में शरर जैसा है
और जो टपके तो वही अश्क गुहर जैसा है


पूछते क्या हो अंधेरो के मआनी उस से  जिसकी रातों का भी अंदाज़ सहर जैसा है 


हूबहू ज़ीस्त की पुरखार रह-ए-गर्दिश का नक़्श हर एक तेरी राहगुज़र जैसा है 
दिल के हर ज़ख्म सितारें हैं सितारों में कोई  ज़ख्म ऐसा भी है वाहिद जो क़मर जैसा है 
आँधियाँ आई, गयी,अपनी जगह से न हिला  अज़्म मेरा किसी मज़बूत शजर जैसा है 
अपने अंदर तो फ़रिश्तें सी सिफत रखता है पर बज़ाहिर वो कोई आम बशर जैसा है 
वोही गिरदाब वोही मौज-ए-तलातुम 'अस्लम' तेवर-ए-दरिया किसी शोख नज़र जैसा है

Mohabbat

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Jaana Need I say more?
Mohabbat
Tamashe kuch aise dikhaye mohabbat Tamasha nazar ko banaye mohabbat
wo darte the maloom tha unko shayad  Hai nashtar kahin chubh na jaye mohabbat
Khuda khush rahe, jisko ye aarzu hai kare wo amal bas baraye mohabbat
jise sare aadaab aate hain iske laqab uska hai aashnai mohabbat
ye hasil ho, sabko hai iski tamanna Sabhi mangte hain duaye mohabbat
sare hashr jab hogi taqseeme nemat wahan dekhna intihaye mohabbat
wo aazaad hain ranjo gham se jahan men Hai jinke saron par ridaye mohabbat
Lagao usi husne kaamil se dil ko wahi hai mukammal adaye mohabbat
Wo aazaad hain ranjo gham se jahan men Hai jinke saron par ridaye mohabbat
Bahot khwahishen nafs ki shorishen hain Samajh isko aye mubtilaye mohabbat
Isiko kehte hain sab dushmane jaan Haqeeqat men sab hain fidaye mohabbat